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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

डॉ. अभय जेरे के ज्ञानवर्धक अभिभाषण को सुनकर हमने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया।

'समावेशी संवृद्धि हेतु उत्तरदायी नवाचार' विषय पर बात करते हुए, डॉ. जेरे ने हमें नई प्रौद्योगिकी विकसित करने हेतु कर्मचारियों को 'इंट्राप्रेन्योर' (संस्था के भीतर उद्यमी) बनने के लिए प्रोत्साहित करके स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा देने के तरीके बताए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अलग-अलग क्षेत्रों से सीखना, विचार-मंथन सत्र और मुश्किलों का सामना करने वाली मानसिकता, विभिन्न समस्याओं के लिए परिवर्तनकारी समाधान ढूँढने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उनका संदेश था कि हम पारंपरिक तरीकों से हटकर नवाचार के नए मॉडल ढूँढें और ऐसे ठोस परिणामों को प्राथमिकता दें जो हमें सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था से ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएं।

अभियांत्रिकी और गैर-अभियांत्रिकी क्षेत्रों के बेहतरीन समाधानों के वास्तविक दुनिया प्रकरण अध्ययन साझा करते हुए डॉ. जेरे ने समस्याओं को सुलझाने हेतु बहुआयामी दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने असफलताओं का उत्सव मनाने का समर्थन किया और हमें उन कहानियों को साझा करने हेतु प्रेरित किया ताकि हम गलतियों से सीख सकें।

एआरएआई के निदेशक डॉ. रेजी मथाई ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की विरासत पर चर्चा की और एक अभिनव भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उत्सव मनाया। कार्यक्रम का समापन एआरएआई की वरिष्ठ उप-निदेशक श्रीमती उज्ज्वला कारले के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

यह एक प्रेरणादायक बातचीत थी जिसने हमारी सामूहिक सोच को नई दिशा दी है और 2047 तक 'विकसित भारत' के हमारे लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में हमारी महत्वाकांक्षाओं को गति प्रदान की है।

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